Archive for February, 2012


कुछ ख्वाब आते हैं
सोती नहीं कई बार रात रात भर
दिन के उजालों में लेकिन वो
दबे पाँव जाने कैसे छुपते छुपाते
आँखों में न सही
ज़हन में उतर जाते हैं
ये ख्वाब सच न हों डरती हूँ
देख न ले कोई और इन्हें
यही सोच कर नज़रें झुकी रखती हूँ
आँखें कर लूँ बंद
फिर भी कहाँ छुप पाते हैं
कुछ ख्वाब तो आते हैं

ये अगर में हूँ तो
ख्वाबों में है वो कौन
हकीक़त जिसे समझे हैं
कहीं वही भ्रम तो नहीं
वो चेहरा जो जचा नहीं
उसे ख्वाब मान लिया
खवाबों में अब जी रहे हैं
क्या अब किसी को गिला नहीं

कह दो उन ख्वाबों को
उनकी हकीक़त नहीं कुबूल
यूँही छुपे रहे और
किसी से कुछ न कहें वो
हम दुसरे ही ख्वाब में जी रहे हैं
जीने दें हमें
लिबास किसी और का ही सही
पहन लेने दें हमें
कुछ देर के लिए ही तो हम
दुनिया में आये हैं

कुछ देर के लिए ही तो हम
दुनिया में आये हैं
गौर किया नहीं क्यूँ मैंने पहले इस बात पर
कुछ दिन ही तो हैं मेरे पास
औरों के डर ने फिर क्यूँ मुझे डरा दिया
आँखें खुली हैं अब तो देखो
कुछ ख्वाब तो आते ही हैं
झूठी हकीक़तों को धुन्दला कर
मेरे एहसासों पर पड़ी धुल
रुई सी हवा में उड़ा ले जाते हैं


वो तेज़ हवा का झोंका क्या था जो आया, बस छु कर चला गया
हवा हूँ मैं, गति हो मुझमे भी के शीतल रहूँ और सुकून दूँ
किन्तु रफ़्तार हो बस इतनी के लोग साँसों में बसा सकें
पलकें मूंद लें सभी ऐसी गति की मुझे चाह नही

ज़िन्दगी

Posted: February 12, 2012 in Poems
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अपनी ही है ये ज़िन्दगी, ऊधार में तो मिली नहीं
किश्तों में फिर क्यूँ जी रहे, कोई मजबूरी तो नहीं ये ज़िन्दगी
हंस लिए कुछ देर तो, कुछ देर आंसों भी बहाइये
उन आन्सुयों की याद में मगर ,
जो मुस्कुराहटें मिली उन्हें ना भुलाइये

Grow Up Not To Grow Old

Posted: February 12, 2012 in Poems
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Grow up not to grow old
But to wonder at beauty in the ocean,
to see around and to breathe in the sky

Grow old not to end your life
Grow old to live a little more