प्यार का अस्तित्व

Posted: April 5, 2012 in Poems
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प्यार तरल है,
हर रंग उसमे घुल जाये
जो आकार दो,
बस उसमें ही ढल जाए

लहरें ने कब सोचा ऐसा
क्यूँ मैं ही जा कर मिलूं हमेशा
आये चट्टान मिलने मुझसे अब की बार
चट्टान ने भी क्या कभी करी शिकायत
छील कर तन मेरा इन लहरों ने
देखो मेरी धार छीन ली
करता हरदम इंतज़ार
की लहरें आयें
दें उसे एक आकर नया
लहरें भी चट्टान का रंग लिए
एक नया अस्तित्व बनाती
दीवानी सी अपने प्रेम गीत को गरज गरज सुनाती हैं

शर्तों में बंध कर कहाँ रिश्ते संजोय जाते हैं
गांठों में उलझ कर अक्सर
घुटते हैं और बिन टूटे ही बिखर जाते हैं

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