एहसास

Posted: September 22, 2012 in Poems
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एहसास धडकते तो हैं कहीं
क्षण भर को बस दब से गए
कुरेदने से रोते हैं पर
कहते हमसे कुछ भी नहीं
कदमों के रुकते ही सहम जाते
कोई साथ हो तो दीखते नहीं
दूर से देख कर ही अब सुकून पाते हैं
कहते हैं छुना न मुझे

पर हर बार बिखरने को आतुर,
बेख़ौफ़ दर्द से, रुसवाइयों से
बंधनों को तोड़ने में सक्षम
जीवन को मझधार में छोड़ने को
तैयार फिर से सपने बटोरने को

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