Archive for March, 2013


1) कहना तो कुछ नही, फिर बात तुमसे क्या करें
इसी उलझन में हम, कहानी कई बुनते रहे

2) इस बार दर्द को शिकस्त देने कि तैयारी थी
पर इश्क में कब तज़ुर्बो कि दलीलें काम आयी हैं

3) अब वो हालात कहाँ, जज़्बात वही लाएँ कैसे
इश्क होने को वक़्त थोडा तो मुहैया करता

4) अपने सुकुन पे बड़ा गुमान था
तो लीजिए आज फिर इश्क हुआ

5) बेड़ियों से तो ना बंध पाऊँगी
इश्क से ऐसा बाँधों के तुम हो जाऊँ मैं

6) इश्क तो कर लें, चाहते भी यही हैं,
किस से दिल लगाएं मगर, कोई बताता नहीं है

7) ये ख्यालो की दुनिया कितनी शायराना है
इसको हक़ीक़त बना लें तो, क्या ये बिखर जाएगी

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इश्क में हैं

Posted: March 17, 2013 in Poems
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1) इश्क के चर्चे तो बहुत सुने थे मगर
ख़ुद ही किस्सा बनेगे, ये सोचा नहीं था

2) जज़्बात और ख्यालों की बात कुछ और है
वक़्त की पाबंदियाँ तो सिर्फ तेरे-मेरे लिए हैं

3) आंखों में नमी नहीं, दिल भी सुकून से सो रहा
सांसे हैं या ये धधकती नब्ज़, जो जिंदा होने का आभास हैं

4) ये जो तुमने दिये हैं तो दुआ ही होंगी
आँसुओं ने ही तो अकसर दास्तने लिखी हैं

5) क्या हुआ याद रहे, ऐसे मेरे हालात कहाँ
ये मौसिक़ी नहीं, कुछ पलों ने बस करवट ली है

6) तेहज़ीब के गलियारों में खामोश सी सिसकियाँ हैं और कुछ मुस्कुराहटें हैं
यूँ खिलखिलाना और कभी दर्द का सैलाब बहाने की बेअदबी यहाँ गंवारा नहीं

7) आँसू हैं, कमजोर ना समझ इनको
इसके सैलाब में बस्तियां कई डूबी हुई हैं

8) इश्क में हैं, महफिल में क्यों ले आए हमें
तुमसे तो छुपा ना सके, ज़माने से छुपाते कैसे