दर्द का सौदा

Posted: April 29, 2013 in Poems
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1) फिर आज मुझे तू यकीन दिला, मेरा डर बस एक वहम है
इंसानो कि बस्ती का खौफ, ले जा रहा मुझे फिर वीरानो में

2) ये वो हसरतें ही हैं, जिन पर मैंने कभी सुकून वारा था
हसरतों का कफन लपेटे, उसी सुकून कि मैय्यत पड़ी है

3) खुशी की जिद नहीं, गम ही दे तू मेरे हिस्से में
कुछ आँसू बहें तो, जज़्बात जिंदा रहेंगे

4) सामान तो तूने जुटा लिए अपनी सांसें चलाने को
जिंदा रहना काफी है क्या, ज़िन्दगी बिताने को

5) दर्द का सौदा ऐसा बुरा भी नही है
सभी खरीदार ना सही, बाँटना चाहता हर कोई है

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Comments
  1. Shubh says:

    5 छंदों में जीवन के कुछ कटु सत्य।

    • Rijuta says:

      सत्य-असत्य का फेर तो नहीं जानती। जब जैसा महसूस होता है, वही लिखा जाता है 🙂

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