वो प्यार था

Posted: April 29, 2013 in Poems
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1) खुद न आ, अपनी यादें तो हम तक पहुँचने दे
कई रोज़ हुए, भूले हैं मुहब्बत कैसी होती है

2) मुहब्बत की कचेहरी में क़ाज़ी की दरकार कहाँ
जिरह भी मुहब्बत, फैंसला भी मुहब्बत

3) तुझे सामने बुलाऊँ क्या, तुझ पे भी तो सवाल हैं
आंसुयो से जंग छिड़ी हुई, दिल का होना बस ख्याल है

4) ये तूने क्या बात कही, हमने तो थी छुपा रखी
नही, वो तेरा ही कोई ख्याल रहा होगा
कोई नही जानता मेरे सिवा, उस दिल के हाल

5) गर बातों में ही हो जाती मुहब्बत
तो तूने भी कितना कहा था
और मैं भी कहाँ चुप रही थी

6) कल जो किया तुमसे, वो प्यार था
आज फिर कैसे, मैं बेरंग हुई

7) गम को गले से लगाएँ, तो लगाएँ कैसे
इश्क मेरा मुझे, बहुत देर रोने नही देता

8) इश्क ना कर, कहते हैं डूब जाएगा
साहिलो पे रह के भी कभी, समन्दर पार हुआ है

9) इश्क हुआ तो है मगर, कुछ ऐसे हुआ
दिल तार-तार है और सब कहें, हैं साज़ सजे हुए

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Comments
  1. Shubh says:

    बेहतरीन !

  2. anurag says:

    दिल को हिला के रख देने वाले अलफ़ाज़ बहुत पसंद आ रहे हैं!

  3. ritu mala says:

    bahut khoob aur umdaa!!!!!!

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