दर्द का किस्सा

Posted: May 20, 2013 in Poems
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दर्द था दिल का, जो तुमसे बाँटा था
अफसाना बना कर, तुमने उसे मश्हूर किया

कई कहानियाँ, जो तुमने दी थीं मुझे
कौन सी मेरी है, हो सके तो बताना

यूँ मेरा नाम भी पूछोगें तो भूल जायेंगे
और तुम कहते हो के दिल की बात करते हैं

दिल की बातों का ज़िक्र क्या करना
चलो एक किस्सा तुम्हे दिलचस्प सुनाते हैं

मेरे दर्द का किस्सा बना कर, दुनिया में सुनाते हो
दूर जाकर, दूरियों का इलज़ाम फिर मुझ पर लगते हो

ये मुहब्बत है या खंजर है
हर बात पे उसका खौफ दिखाते हो

मुहब्बत के नाम पर दर्द लिखते हो
वो इलज़ाम सहे, फिर उससे नफरत भी करते हो

दुनिया को भी साथ कर लिया अपने
हम तो अब तनहा ही इंतज़ार करते हैं

आप का जवाब नहीं
भीड़ भी चाहिए
और तन्हाई का दावा भी

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