दिल का क्या है

Posted: May 20, 2013 in Poems
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क्यूँ खोजते हो आंसुओ में, मेरे गम के सबूत
नब्ज चलती हैं जब, आंखे छलकेंगी ज़रूर

ख्वाइशों में भटके तो राम को भूले और सपने सजोना भी भूल गए
इबादत और सपनों के व्यापार में हंसी-ख़ुशी का मोल ऐसा मिला
अपने से दूर हुए और अजनबियों का दिल बहलाते रहे

ग़मों को अपने सींच कर, तूने ऐसा बड़ा किया
के खुली आंखों से भी तुझे, दुनिया बेपरवाह लगे

ख़ुशी ज़ाहिर होती है कभी, कभी गम बाँट लेती हूँ
और कुछ नहीं होता तो, खुद पे ही थोडा हंस लेती हूँ

आप का जवाब नहीं
भीड़ भी चाहिए
और तन्हाई का दावा भी

दर्द के नाम पर दोस्ती मत करना
दर्द के रिश्तें अक्सर दर्द देते हैं

एक छत देकर तुमने एहसान तले दबा दिया
और मुझसे मेरा आसमाँ भी चुरा लिया

मैखाने का दस्तूर है शायद
बुरा-बुरा बोल कर पिए जा रहे हो
पिए जा रहे हो, जिए जा रहे हो

एक छत देकर तुमने एहसान तले दबा दिया
और मुझसे मेरा आसमाँ भी चुरा लिया

एक वक़्त था, आँखें भी पढ़ा करते थे
वक़्त बदला और देखा, नज़रें भी कहाँ एक सी रहती हैं

अजब सी दुनिया में गजब से हम
हर कदम, हम-कदम, दुनिया के नए रंग

दिल का क्या है, टूटता है
फिर हो जाता है तैयार टूटने को

एक बार इबादत होने दे, सर खुद-ब-खुद झुक जायेगा
मुहब्बत दस्तूर देखे तो मुहब्बत नहीं, बस वहम है

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Comments
  1. Rijuta says:

    Dhanyavad Anurag!!!

  2. Anurag says:

    आँखों और नब्ज़ का रिश्ता बहुत ही नज़ाकत से बयां किया है! वक़्त और नज़रों का बदलना बहुत खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया है! करतल ध्वनि के साथ आपको सहर्ष नमन!

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