Archive for June, 2013

Logic and Divinity

Posted: June 18, 2013 in Thoughts
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A logical mind says that apple was ripe and due to gravitational force, it had to fall down.

A person lying helplessly waiting for his death due to starvation sees blessing when an apple falls.

“The apple had to fall” is logic. “Moment of its fall” is divinity.

Anything that brings back hope is divine. Name it God or something else. It is individual’s choice.

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1) मुहब्बत के बारे में बहुत कुछ सुना था
मिले तो लगा, लोगों ने कम ही कहा था

2) एक बार तेरा नाम पुकारा था
आज लौट के आयी है वो आवाज़
बदली हुई है
तूने कब छु लिया उसे

3) वक्त के इंतज़ार में, ज़िंदगी गुज़ारी है
वक्त निकलता रहा, ज़िंदगी भी क्या रही

4) कमाल तो तुमने भी किया, एतबार टूटा तब कहा
क्यूँ यार तुम, यूँ एतबार करते हो

5) हमने बस एक बात की, लफ्जों में धार किसने दी
खून बिखरा हर तरफ़, दर्द बहुत है इधर भी