Archive for July, 2013

छोटी सी एक याद

Posted: July 30, 2013 in Poems
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बहुत कुछ था जो घटा था उन दिनों में
आज छोटी सी एक याद बन कर रह गया है
बातें भी क्या करूँ उन बीते दिनों की
पीछे मुड़ कर कब तक तकती रहूँ मैं

समय का अभाव है या अहम् है मेरा
यादों को रख छोड़ा है आने वाले कल के लिए
कल जब समय होगा तो याद करके तुझे शायद
तेरे क़रीब आने के बहाने फिर मिल जाएँ मुझे

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फुरसतें

Posted: July 20, 2013 in Uncategorized

Prevalent yet Unseen

उन तनहाइयों की गहराईयों में गोते लगाना
और खाली बैठना भी कितना पसंद था मुझे
अब बिना उलझनों की ज़िन्दगी व्यर्थ लगने लगी है
चलते रहो तभी जिंदा होने का एहसास है
तनहाइयाँ भी डराने लगी हैं
के कहीं अकेला समझ, तरस न खाने लगें लोग
कुछ वक़्त लेकिन, आज खाली बैठ कर
खुद के साथ बिताने की ललक फिर से उठी है
भीड़ में घिर के चलते चलते,
अब रुक कर, बस अपने ही साथ
साँसों की आवाजें सुनने के लिए
फिर से टटोलने लगी हूँ उन्ही फुरसतों को
वही फुरसतें जिनमे प्यार हुआ करता था
बिन बातों के भी रात गुज़र जाती थी बातों बातों में

वो आँसू जो सिर्फ आँखों से टपकते थे
नापती नहीं थी हर कदम चलने से पहले
रुक गए हैं कदम अब, जंग लगी है ज़िन्दगी में
आंसुयों ने भी तो आँखों के रास्ते छोड़ कर
घर कर लिया है मेरे ज़हन में

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एक नाम हो तुम

Posted: July 7, 2013 in Poems
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1) झुकती नजरों को जो तुम पढ़ पाते
हमें भी इश्क पर अपने गुमाँ होता

2) एक शक्ल से जुड़ा, एक नाम हो तुम
कहाँ इससे ज्यादा तुम्हे, पहचानती हूँ मैँ

3) इश्क होगा तभी, अगर वो सामने हो
इब्बादत क्या कभी, यूँ बुतों की मोहताज थी

4) वो जो दुनिया थी मुहब्बत वाली
समझ ने आज उसको भी वीराना किया है

5) तेरे खोने का गम मनाती कैसे
तेरा होना कब वहम नही था

6) ना गम है, ना कोई वहम है
लफ्ज़ हैं, बातें बेमतलब की बोलने को

7) ख्वाबों के पंख मत काटो
दायरो में तो ज़िंदगी जी ही रहे हो

8) कहीं कोई बात नही, हर बात पे तो जंग छिड़ी
पहले बातों में छिड़ी थी, आज खंजर की नोक बनी

9) कहते हो के सच कहो
फिर चुप भी नही रहने देते