Archive for September, 2013


क्या कह कर रोक लें तुझे जाने से
हम सोचते रहे, व़क्त निकलता रहा

कितना जरूरी है चुप रहना
बहुत कुछ बोला, फ़िर समझ आया

बातें हैं सफ़र की, डगर की और मंजिलों की
जो चलने से अगर इनकार कर दूँ मैं
क्या मेरा किस्सा, कोई फिर भी सुनाएगा

मेरी ही बातें मुझको न सुनाओ
खुद को पहचानना और मुश्किल होगा

मिजाज़ कुछ ऐसे हैं इन दिनों
कोई कुछ भी कहे, सब तारीफ़ ही लगे

कहने और सुनने के दौर जब चलते हैं
निकल पड़ते हैं हम भी शब्दों का पिटारा लेकर

ज़िन्दगी के हाल

Posted: September 2, 2013 in Poems
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ये भी अच्छा रहा हमने पढ़ा था
जिंदा रहने को ज़रूरी है दिल धड़कना
कभी जब भूलने की कगार पर खड़े होते हैं
धड़कने सुन कर जान लेते हैं
अपनी ज़िन्दगी के हाल