दायरे

Posted: October 18, 2013 in Poems
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1) दायरो में बन्धे हम, बन्धे तुम
ख़ुद के गिर्द घूमते, नज़दीक आ पाते नही

2) एक अक्स ज़माने में रख छोड़ा था
उस दायरे में आज मेरी पहचान बंधी है

3) एक दर्द ही तो था, जिसे सँजो रखा था
हँसी-हँसी में आज उसको भी रुसवा कर दिया

4) तेरी इस बात पर क्या कहें, सोच नही पाते
हँसी में उडा कर देखें, आगे क्या होगा

5) ख़ुद से ख़ुद को बेखबर रखा हमने
और तुम कहते हो, पहचानते हो हमे

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Comments
  1. ravichauhan23 says:

    दायरे में ना तुम बन्धे हो ना हम , बस अहसास है कि मै , मैं हूँ या तुम ,
    सोचा था कि एक दिन हंसेंगे तुम पर , पर बिन पहचान के थे तुम और हम

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