ये दर्द भी कुछ अजीब है

Posted: November 23, 2013 in Poems
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1) बाहर कुछ आवाज-सी तो है, पर बातें सुनाई नहीं देती
दिल में जो बातें हैं, बस वही गूंजती हैं कानों में

2) देखा है कुछ लोग दिन-रात दुआएं करते हैं
लगता है वो भी किसी से प्यार करते हैं!

3) बंद आखों से तो तेरे ख्यालों को नकार दें
पलकों के उठते ही ये झूठ भी पकड़ा जाता है

4) ये दर्द भी कुछ अजीब है
होता नहीं जिसे, वो खुद पे तरस खाता है

5) आज मेरे सामने, एक सिर्फ़ मैं ही हूँ
बदगुमानी है मुझे, दुनिया बस यही है

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Comments
  1. shubh says:

    “आज मेरे सामने, एक सिर्फ़ मैं ही हूँ
    बदगुमानी है मुझे, दुनिया बस यही है”
    आह भी.…… और.……वाह भी!
    अति उत्तम!
    ये पंक्तियाँ समस्त दर्शन शास्त्र का निचोड़ हैंI

    • Rijuta says:

      नहीं मालुम शुक्रिया कहना काफी होगा या नहीं। लेकिन और क्या कहना चाहिए ये भी नहीं जानती।

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