Archive for March, 2014


1) ख्वाइशें कई, हर ख्वाइश में वही
एक ज़िंदगी तेरी, मेरी ज़िंदगी वही

2) हृदय एक ही देते हो तो, विस्तार इसका बढ़ा दो
या फिर कुछ ऐसा करो के, जज़्बातो को घर नया दो

3) बातें होती अगर, कुछ हम कहते, कुछ सुन लेते
एक आह थी बस मगर, हर साँस डुबाने को

4) तेरी खामियों का पुलिन्दा राख हुआ जाता है
कैसे अब इश्क होने से ख़ुद को रोकूँ मैं

5) सच होने की उम्मीद में, कई ख्वाब सँजो रखे हैं
कत्ल उम्मीदो का, हक़ीक़त तो कर नही सकती

6) शब्दों को तलाशती बातें मेरी
रास्तों पर पड़ी, घर लौटती नहीँ