Archive for April, 2015


हर दिल अज़ीज़ थीं जब इश्क की बातें,
जुबाँ की लचक पे चेहरा वो सुर्ख था,
होँठ हिलते न थे, नजरें उठती न थीं

चेहरों पे लकीरों का दौर चला फिर,
आज ज़िक्र-ए-मोहब्बत का खौफ देखिये,
होँठ हिलते नहीं, नजरें उठती नहीं