Posts Tagged ‘Love; Poem’

Even if Your Name is Death

Posted: September 12, 2016 in Poems
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Even if your name is death,
I shall not let you love me in bits and pieces.
Come to embrace me with open arms,
I am standing at the door to welcome you.

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Burning Coal

Posted: September 12, 2016 in Poems
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In lieu of burning coal that he threw away;
He placed his hand to fill my palm.

Holding my Hand

Posted: February 22, 2016 in Memories, Poems
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I held my hand,
and plucked out the thorn.
The thorn that was digging deeper,
with touch of your hand.


हर दिल अज़ीज़ थीं जब इश्क की बातें,
जुबाँ की लचक पे चेहरा वो सुर्ख था,
होँठ हिलते न थे, नजरें उठती न थीं

चेहरों पे लकीरों का दौर चला फिर,
आज ज़िक्र-ए-मोहब्बत का खौफ देखिये,
होँठ हिलते नहीं, नजरें उठती नहीं


1. मेरे जनाज़े पे बहाने को तो, आँसू तुने संजो रखे हैं
आ पास बैठ कुछ देर, ज़िंदगी में भी साथ रो लेते हैं

2. कोहरे की सीलन जज़्बातो पर उतरी पड़ी है
तुम कहो तो ख़ुद को जलादें या धूप का इंतज़ार करें

3. अपनी खाली जेब उड़ेल कर, उसने झोली मेरी यूँ भरी
सब कुछ मैं लुटाए जाऊँ, फिर से भर-भर पाऊँ मैं

4. आइनो में धुँधला धुआँ था और धुँधला अक्स भी
चिंगारियाँ जो दफ्न की, न आग हुई ना बुझ सकी

5. अभी मसरूफ हूँ, कुछ देर में आना
ज़िंदगी को भी कहा है मैंने, इंतज़ार करने को

6. वो एक किस्सा, सिर्फ़ तेरा तो नही था
आओ, उसे हिस्सों में बाँट लेते हैं
इस बहाने कुछ वक्त साथ गुज़र जायेगा

इबादते

Posted: January 9, 2015 in Poems
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  1. इबादते भी तो छुप कर की हैं मैंने,
    के मेरा मज़हब न पहचान ले कोई
  1. ना अवतरित था, ना पाप का जना कोई
    किसी को देवता, किसी को दानव बता दिया
  2. हर कत्ल भी गुनाह तो नहीं होता है
    मेरे रहनुमा से मैंने ही मौत मांगी है

4. अपने से ही जो तुम ख़ौफज़दा हो
कैसे कहो फिर, इश्क गैरों से करोगे


1) सिर्फ़ पत्थर का होता, तो तराश लेते इसे
उलझन तो यही है के कुछ और भी है ये दिल

2) जज़्बातो के परे एक दुनिया है,
वही तो पता है इन दिनों मेरा

3) देह का व्यापार घृणित है
आओ, रूह की नीलामी करें
और, सभ्य हम बन जाएँ

4) वो पन्ना जिसकी नाव बना कर, पानी में तुमने छोड़ा था
शब्द नही बहे थे केवल, अंश मेरा भी उसमें खोया था

5) आसमानो में बैठा मैं, हुक्का गुड़गुड़ा रहा था,
फिर बहा जो आंखों से, धुआँ था या सपना कोई

6) कफ्न का इंतज़ार नही, ए ज़िंदगी!
सिर्फ़ जिंदा नही मैं, जी भी रही हूँ